Posted by: ranjanrao | दिसम्बर 17, 2010

घर की याद

यह दीवारें अगर बोल पाती तो

मुझे मेरे घर की याद ना आती

 

सब कुछ तो है माँ बाप भाई बहन

फिर किसी और की याद न आती

भरे पूरे परिवार मॆं अकेलेपन का एहसास न लाती

याद आती भी तो उन पुरानी यादो की यादो मॆं खो जाती

यह दीवारें अगर बोल पाती …

 

 

बचपन का वोह लड़ना झगड़ना

और छोटे का बिफर कर अकड़ना

रूठना, रूठकर  मनाना

फिर आज बड़े छोटे की बात न आती

यह दीवारें अगर बोल पाती …

 

अदृश अश्रुधार से वोह तस्वीर

जो मेज़ पे कभी रखी नहीं

वोह धुल न पाती

यह दीवारें अगर बोल पाती …

 

 

गली वही है, कूचा भी वही है

फिर भी घर के सामने पता पूछने की नौबत न आती

फिर अपने घर आके भी मुझे अपने घर की ही याद ना आती

दिन रात चलते म्यूजिक के इस शोर से सन्नाटे की आवाज़ न आती

यह दीवारें अगर बोल पाती …

 

 

मुझसे तो यह दीवारें फिर भी बोल लेती हैं

कहती हैं सब ठीक हो जायेगा

पर काश कभी सच भी बोल पाती

अगर यह दीवारें सच बोल पाती …..

 

 

अगर मेरी आवाज़ सीधे ही पंहुंच जाती

तो बीच मॆं यह दीवारों कि दीवार ना आती

रिश्ते नाते रूपया पैसा, वीर कायर

अपने पराये की कभी बात न आती

आती भी तो पक्का कोई खिड़की ही खुल जाती

यह दीवारें अगर कुछ बोल पाती …


Responses

  1. यदि ये लिखूं कि ‘दिल को छू गई’ तो आपको अच्छा ना लगे.बहुत सस्ता कर दिया है इस शब्द को यहाँ सबने.
    इतना कहूँगी….जैसे मेरे अपने भीतर को बाहर देख रही हूँ.दीवारे बोलती होगी…..मुझे तो अरसा हो गया उन दीवारों के पास गये ,उन्हें छुए.पापा मम्मी,सास ,ससुर गये…..दोनों घरों की दीवारे पराई हो गई.
    कितना दर्द है इस कविता में.जियो…नही मालूम कौन हो मेल ???फिमेल??? बस कविता पढ़ रही हूँ.
    जो भी हो आप..प्यार.

    • @Indu: dhanyawaad indu ji……kise pata hai ki woh kaun hai..naam, dharm jaati yeh sab to bus man ko santvana dene wale kaarak hain ..ya yun kahoon ki ..jhuthlane wale hain ki hain hum jaante hain ki hum kaun hain..

      aapko kavita/abhivyakti achi lagi jaankar khushi hui….

      maine aapka blog bhi dekha but poora padh nahin paaya….

  2. Hey Ranjan,

    Just checked out your blog, seems you are an eloquent writer :) ! Good man. I could only go through a couple of posts. Nice to know that you can easily express what you feel in words. It’s a tough job :-) !


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